क्या मुझे मेरे माता पिता भाई बहन पत्नी बच्चों के संबंध से जाना जाता है?
फलां का बेटा, फलां का पिता, फलां का पति?
या मुझे मेरे धर्म,जाति,क्षेत्रीयता से जाना जाता है?
या मुझे मेरी शारीरिक बातों से पहचाना जाता है?
लंबा नाटा, पतला मोटा, गोरा काला, मज़बूत कमज़ोर?
या फिर मुझे मेरे मित्र समूह से, उन संगठनों से जाना जाता है जिनसे मैं जुड़ा हूं?
मुझे मेरी आर्थिक स्थिति और साधनों से जाना जाता है
या मेरे व्यक्तित्व,मेरे व्यवहार, दूसरों से मेरे संबंधों से
मेरी खासियत से मेरी उपलब्धियों से, मेरे जीवन मे घटी घटनाओं से ?
या मुझे मेरे काम से या कार्यक्षेत्र से पहचाना जाता है?
मेरे शौक़, मेरी विशेषज्ञता से, मेरे गुण अवगुण से
आखिर किससे मुझे जाना जाता है?
क्या है मेरी पहचान ?
पहचान एक आपस में गुथी हुई बात है,
एक ही समय मे इंसान अलग अलग बातों के लिए पहचाना जाता है
अलग अलग लोग अलग अलग तरह से पहचानते हैं
हर आदमी उम्र के अलग अलग दौर में अलग अलग तरीके से पहचाना जाता है
जो स्वाभाविक भी है, इसमे से कुछ पहचान हमें
अपने आप बिना कुछ किये मिल जाती है
और कुछ पहचान हम खुद बनाते हैं
आपको जिस रूप में भी पहचाना जाता है
आपको उससे जुड़ी भूमिका अपने आप मिलती है
आदमी की दो पहचानें आपस में टकराती हैं
कई बार आप कई भूमिकाएँ निभाते रहते हैं
परंतु आपको वो पहचान नहीं मिलती
आप अपनी पहचान किसी और रूप में चाहते हैं
और आपकी पहचान बनती किसी और बात से है
कुछ पहचानें ज़िन्दगी भर पीछा नहीं छोड़ती
और कुछ पहचान ज़िन्दगी भर नहीं बन पाती
कोई ज़रूरी नहीं कि जो पहचान आपकी बनी है आप उसके लायक हों ही,
हो सकता है आप अयोग्य हों या ज़्यादा के हकदार हों
जो भी हो, आप जिस पहचान के लिये संघर्ष करेंगे,
जिसके लिये सर्वस्व झोंक देंगे, जिसके क़ाबिल बनेंगे
जिसके लिए सुनियोजित तरीके से काम करेंगे
वो पहचान आपकी ज़रूर बनेगी
आपकी पहचान ही इस दुनिया में आपके हस्ताक्षर हैं
इस पर होने वाले हमलों की काट ज़रूर करना
अपनी पहचान को लोगों के दिलों पर चस्पा होने लायक प्रभावशाली बनाइये
अपनी एक पहचान को जंजीर मत बनने देना,
अपनी पहचान को पायदान बनाना ऊपर उठने
क्योंकि हम मिट जाएंगे, फना हो जाएंगे, मिट्टी में मिल जाएंगे
पर हमारी पहचान रह जाएगी,
कहीं किसी नाम, कहीं किसी नंबर, कहीं किसी किस्से में, किसी दास्तान में, किसी इतिहास में
इसलिए अपनी पहचान को लेकर जागरूक रहिए, संघर्ष कीजिये
गैर जरूरी पहचान को तिलांजलि दीजिए
अपनी पहचान को सही आकार दीजिए ताकि लोग आपको याद रखें।
@मन्यु आत्रेय
Sach kaha..Bahut khoob likha hai sir👌👌👌💐💐💐
ReplyDeleteVery nice sir👌👌🙏🙏💐💐
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