body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Friday, 29 November 2024

मेरी अधूरी प्रेम कहानी


@ मन्यु आत्रेय


एक उम्र में आंखों में हसरत थी, 

ज़िंदगी की राहों में आखें बिछाये बैठा था कि कोई तो हो जिसे आखों में बसा सकूं। 

आंखें थकने लगी थी कि तभी किसी से आंखें चार हो गई और वो आंखों में उतर गई। 

आंखों की भाषा आखें पढ़ने लगी। दिन रात आंखों ही आंखों में कटने लगे। 

लेकिन पता नहीं था कि कोई हम पर आंखें गड़ाये बैठा है। मैं किसी की आंखों का कांटा बन गया हूॅं। 

प्रेम में आंखों पर ऐसा परदा पड़ गया था कि समझ ही नहीं आया कि वो धीरे धीरे आंखें फेरती जा रही थी। 

अब वो मुझसे आंखें चुराने लगी थी। 

वो खुद किसी और की आंखों में गड़ गई थी, उसकी आंखें फिर किसी और से चार हो गई थी। 

बड़ी होशियारी से वो मेरी आंखों में धूल झोंक रही थी। 

उसकी आंखों का तो पानी ही मर गया था लेकिन मैं प्रेम में आंखों का अंधा बना रहा।

मैं जो उसकी आंखो का तारा था, कब उसकी आंख की किरकिरी बन गया समझ ही नहीं आया। 

जिसे मैंने आंखों पर बिठाया था वो बात बात पर मुझे आंखें दिखाने लगी थी, 

छोटी सी चूक पर भी आखें लाल पीली करके देखती थी। 

उसे देखने के इंतज़ार में आंखें थकने लगी थी। 

आंखों में तेल डालकर मैं उसकी प्रतीक्षा करता रहा। 

उसकी आंखों में चर्बी छा चुकी थी, अब वो कहीं और आंखें सेंक रही थी। 

मैं फिर भी खुश था कि कम से कम उसकी आंखें तो ठंडी हो रही हैं। 

मेरी वफ़ा और उसकी जफ़ा में आंख मिचोली चल रही थी। 

आखि़रकार उसने मुझे आंख में पड़े तिनके सा अपने जीवन से निकाल दिया। 

मेरी आंखें रह रह कर भर आती। 

आखें मूँद लेने का ख़्याल मन में आ जाता, कभी लगता कि आंखें बंद ही हो जातीं। 

मेरी ग़लती सिर्फ़ यही थी कि उस पर आंखें मूंद कर भरोसा किया,

 उसे आंखों की पुतली बनाये रखा, उस पर आंखें नहीं रखी। 

मगर इस धोखे के बाद मेरी आंखें खुल गई और मेरी आंखें पत्थर हो गई  

मैंने ठान लिया था अब इन आंखों में कोई नहीं बसेगा।

मगर कुछ दिनों बाद जब आँखों का पानी जम गया 

किसी और से मेरी आँखे चार हो गई.


2 comments:

  1. इस तरह अधूरी प्रेम कहानी कही जाकर कही और पूरी हो गयी।अपने लिए इश्वर जो चीज बनाते है,वो हमेशा अपने पास आती है।जो चीज अपनी नही होती वो कभीअपने लिए होती ही नही।

    ReplyDelete

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...